थाना फजलगंज पुलिस ने साइबर ठगी नेटवर्क के 03 अभियुक्तों को किया गिरफ्तार, 23 बैंकों में करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
पत्रकार जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना फजलगंज पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 03 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में कपिल वर्मा उर्फ सेंटी और अभय प्रताप सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं। तीसरे अभियुक्त से पुलिस पूछताछ कर रही है और उसके नेटवर्क को खंगाल रही है।
शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में पुलिस आयुक्त कानपुर नगर श्री रघुबीर लाल ने प्रेस वार्ता कर इस पूरे रैकेट का खुलासा किया। इस दौरान उनके साथ डीसीपी साउथ और साइबर क्राइम सेल के अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस आयुक्त ने बताया कि यह गिरोह पिछले कई महीनों से सक्रिय था और देश भर में साइबर ठगी की रकम को फर्जी खातों में घुमाकर ठिकाने लगा रहा था।
*कैसे करते थे ठगी, फर्जी खातों का बनाते थे जाल*
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य बेरोजगार युवकों, छोटे दुकानदारों, छात्रों और लालची लोगों को टारगेट करते थे। उन्हें कहा जाता था कि अगर वे अपने नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं तो उन्हें प्रति खाता 40 हजार से 80 हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाएगा। कई बार कहा जाता था कि यह खाता किसी बड़ी कंपनी के पेमेंट के लिए चाहिए।
लालच में आकर लोग अपने आधार, पैन और अन्य दस्तावेज दे देते थे। इसके बाद गिरोह उन्हीं दस्तावेजों पर फर्जी तरीके से सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट और मर्चेंट पेमेंट अकाउंट खुलवा लेता था। मर्चेंट अकाउंट यानी वो खाते जिनमें UPI QR कोड से पेमेंट आता है। जांच में पता चला कि आरोपी एक दिन में 15 से 20 तक फर्जी खाते खुलवा लेते थे।
इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, फर्जी लोन, कस्टमर केयर के नाम पर ठगी और सोशल मीडिया पर ठगी की रकम को लेने के लिए किया जाता था। पीड़ितों से ठगी की गई रकम इन फर्जी खातों में मंगवाई जाती थी और फिर तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर करके निकाल ली जाती थी, ताकि पुलिस ट्रेस न कर सके।
*23 बैंकों में 80 से अधिक फर्जी खाते, करोड़ों का लेनदेन*
पुलिस की प्रारंभिक जांच में ही लगभग 23 बड़े बैंकों में 80 से अधिक फर्जी खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। इनमें निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंक शामिल हैं। साइबर सेल को इन खातों में पिछले 6 महीनों में कई करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला है। इन सभी खातों की डिटेल और स्टेटमेंट अब खंगाली जा रही है।
अभियुक्तों के कब्जे से पुलिस ने 12 एटीएम कार्ड, 3 लैपटॉप, 7 महंगे मोबाइल फोन, 15 प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड, कई फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक, पासबुक और रबर की मोहरें बरामद की हैं। ये सभी सिम अलग-अलग लोगों के नाम पर थीं और इनका इस्तेमाल ठगी और ओटीपी मंगवाने के लिए किया जाता था।
*NCR, लखनऊ से दुबई तक फैला नेटवर्क, बैंक अधिकारियों पर भी शक*
इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इस गिरोह के तार केवल कानपुर तक सीमित नहीं हैं। इसका नेटवर्क NCR यानी दिल्ली-गाजियाबाद-नोएडा, लखनऊ और दुबई तक फैला हुआ है। पुलिस को कुछ संदिग्ध व्हाट्सएप चैट और विदेशी नंबर मिले हैं, जिससे पता चलता है कि ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा हवाला और क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से दुबई भेजा जाता था। वहां बैठा मुख्य हैंडलर पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करता था।
इसके साथ ही पुलिस को कुछ बैंक अधिकारियों और बैंक मित्रों की संभावित मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि बिना बैंक स्तर पर अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में फर्जी खाते खुलना संभव नहीं है। बिना सही वेरिफिकेशन के खाते कैसे खुले, इस बिंदु पर भी गहन जांच की जा रही है। संबंधित बैंकों से सीसीटीवी फुटेज और केवाईसी करने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है।
*पुलिस आयुक्त ने की नागरिकों से अपील*
बाइट - पुलिस आयुक्त कानपुर नगर श्री रघुबीर लाल ने कहा, "हमने साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क को तोड़ा है। हमारी तकनीकी टीम लगातार डिजिटल सबूत जुटा रही है। यह बहुत बड़ा रैकेट है जो लोगों के खातों का दुरुपयोग कर रहा था। किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है। मेरी सभी नागरिकों से अपील है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने दस्तावेज, बैंक खाता, एटीएम पिन, ओटीपी न दें। किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें। यदि आपके साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में शिकायत करें।"
पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ थाना फजलगंज में आईटी एक्ट, धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करना और संगठित अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उन्हें कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा ताकि दुबई और NCR में बैठे मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जा सके। बरामद लैपटॉप और मोबाइल का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है।
पुलिस आयुक्त ने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग अपना बैंक खाता किराये पर देते हैं या कमीशन के लालच में दूसरों को अपना खाता इस्तेमाल करने देते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि अपना खाता दूसरे को देना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
*सत्य का असर समाचार पत्र, कानपुर*
*पत्रकार: जितेंद्र कुमार सिंह पटेल, संपर्क सूत्र: 9956 8340 16*


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