कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर 113.710 मीटर, 3.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया - खतरे से 1.29 मीटर नीचे, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
पत्रकार जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
कानपुर बृहस्पतिवार, 03 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही तेज वर्षा के कारण गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर चिंता बढ़ाने वाला है। बाढ़ नियंत्रण कार्यालय, लोअर गंगा कैनाल, कानपुर द्वारा आज सुबह 8 बजे जारी की गई ताजा रिपोर्ट के अनुसार कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर 113.710 मीटर दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार कानपुर बैराज पर खतरे का निशान 115.000 मीटर है, यानी वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से 1.29 मीटर नीचे है। चेतावनी स्तर 114.000 मीटर है, जिससे वर्तमान जलस्तर मात्र 29 सेंटीमीटर नीचे है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और हर घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है।
कानपुर बैराज पर आज सुबह 8 बजे की स्थिति
बाढ़ नियंत्रण कार्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कानपुर बैराज पर आज सुबह की स्थिति इस प्रकार है। अपस्ट्रीम गेज 113.710 मीटर, डाउनस्ट्रीम गेज 113.460 मीटर, वर्तमान डिस्चार्ज 3,06,197 क्यूसेक, चेतावनी स्तर 114.000 मीटर, खतरे का स्तर 115.000 मीटर और खतरे के स्तर पर डिस्चार्ज क्षमता 5,44,373 क्यूसेक है। इसका मतलब है कि बैराज से इस समय 3 लाख 6 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं और तेज बहाव के साथ पानी छोड़ा जा रहा है।
शुक्लागंज में भी जलस्तर चेतावनी के करीब
कानपुर से पहले गंगा के जलस्तर को मापने वाले शुक्लागंज गेज पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शुक्लागंज में आज सुबह गंगा का जलस्तर 112.330 मीटर दर्ज किया गया है। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। यानी शुक्लागंज में गंगा चेतावनी स्तर से मात्र 67 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। यदि पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो आज शाम तक शुक्लागंज में चेतावनी स्तर पार हो सकता है।
हरिद्वार और नरोरा से छोड़ा गया पानी बढ़ाएगा दबाव
कानपुर में जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण हरिद्वार और नरोरा बैराज से छोड़ा गया पानी है। रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार बैराज से 1,08,697 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण यह पानी छोड़ा गया है। यह पानी 36 से 48 घंटे में कानपुर पहुंचता है। वहीं नरोरा बैराज से 83,835 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। यह पानी भी कानपुर की ओर बढ़ रहा है। इन दोनों बैराजों से छोड़ा गया कुल करीब 1 लाख 92 हजार क्यूसेक पानी जब कानपुर बैराज पहुंचेगा तो कानपुर बैराज पर जलस्तर और बढ़ जाएगा।
प्रशासन ने क्या तैयारी की है
जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी कानपुर नगर के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है। जिला प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराई है। बिठूर, शिवराजपुर, कटरी, शुक्लागंज, और उन्नाव के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। लेखपालों और ग्राम प्रधानों को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं।
नागरिकों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे न जाएं, बच्चों को नदी में नहाने न भेजें, और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
क्यों बढ़ रहा है जलस्तर
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के कारण सभी बैराजों को पानी छोड़ना पड़ रहा है। कानपुर बैराज का जलग्रहण क्षेत्र बहुत बड़ा है, इसलिए हरिद्वार, बिजनौर और नरोरा का पानी मिलकर यहां दबाव बनाता है। राहत की बात यह है कि अभी डिस्चार्ज 5.44 लाख क्यूसेक के खतरे वाले डिस्चार्ज से काफी कम है, इसलिए बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन एहतियात जरूरी है।
आने वाले 24 घंटे महत्वपूर्ण
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि अगले 24 घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं। यदि पहाड़ों पर बारिश इसी तरह जारी रही तो जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर सकता है। फिलहाल स्थिति पर हर घंटे नजर रखी जा रही है। उम्मीद है कि यदि बारिश कम हुई तो जलस्तर स्थिर हो जाएगा।
पत्रकार जितेन्द्र कुमार सिंह पटेल, कानपुर। संपर्क 9956 834016

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