कानपुर में 11 जुलाई को एंडोमेट्रियोसिस पर बड़ा सीएमई: केओजीएस और फोग्सी करेंगे "दर्द, मासिक धर्म और उससे आगे" पर मंथन, महिलाओं की बांझपन और दर्द की समस्या पर होगी चर्चा

कानपुर। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली बीमारी एंडोमेट्रियोसिस को लेकर कानपुर में एक बड़ा वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। कानपुर ऑब्स्टेट्रिक एवं गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी केओजीएस एवं फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया फोग्सी के संयुक्त तत्वावधान में फोग्सी रीच सीएमई के अंतर्गत "दर्द, मासिक धर्म और उससे आगे: एंडोमेट्रियोसिस के अंदर" विषय पर एक दिवसीय सीएमई और प्रेस वार्ता का आयोजन किया जा रहा है।

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न सिर्फ चिकित्सकों को एंडोमेट्रियोसिस के नवीनतम अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों और उपचार पद्धतियों से अवगत कराना है, बल्कि समाज में इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाकर महिलाओं को समय पर इलाज के लिए प्रेरित करना भी है।


एंडोमेट्रियोसिस क्या है और क्यों है खतरनाक

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। यह अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, आंतों और पेल्विस के अन्य अंगों पर भी हो सकता है। हर महीने मासिक धर्म के दौरान यह ऊतक भी खून बहाता है, लेकिन बाहर निकलने का रास्ता न होने के कारण यह शरीर के अंदर ही सूजन और दर्द पैदा करता है।


चिकित्सकों का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका निदान बहुत देर से होता है। कई महिलाओं को सालों तक असहनीय मासिक धर्म दर्द, पुराना पेल्विक दर्द, संबंध बनाने के दौरान दर्द और बांझपन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है, लेकिन उन्हें सही कारण का पता नहीं चल पाता। कई बार इसे सामान्य मासिक धर्म दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।


सीएमई में किन विषयों पर होगी चर्चा

11 जुलाई 2026 को होटल रॉयल क्लिफ, कानपुर में आयोजित होने वाले इस सीएमई में प्रदेश भर के प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ जुटेंगे। फोग्सी रीच कार्यक्रम के तहत देश के शीर्ष स्त्री रोग विशेषज्ञ वर्चुअल और प्रत्यक्ष माध्यम से अपने अनुभव साझा करेंगे।

सम्मेलन में मुख्य रूप से इन विषयों पर फोकस किया जाएगा:

1. एंडोमेट्रियोसिस का जल्दी निदान: अल्ट्रासाउंड और लैप्रोस्कोपी की भूमिका

2. दर्द प्रबंधन: मासिक धर्म दर्द और पुराने पेल्विक दर्द का आधुनिक इलाज

3. बांझपन और एंडोमेट्रियोसिस: आईवीएफ और अन्य प्रजनन उपचार

4. सर्जरी बनाम दवाएं: किस मरीज के लिए क्या बेहतर है

5. जीवनशैली और आहार: एंडोमेट्रियोसिस में क्या खाएं और क्या न खाएं

केओजीएस की अध्यक्ष डॉ. कंचन शर्मा ने बताया कि इस सीएमई के माध्यम से हम जूनियर डॉक्टरों और एमबीएस छात्रों को भी इस बीमारी के बारे में सही जानकारी देना चाहते हैं। अक्सर डॉक्टर भी इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हमारा लक्ष्य है कि कानपुर और आसपास के जिलों में कोई भी महिला इस दर्द को चुपचाप न सहे।


महिलाओं के लिए जागरूकता जरूरी

सोसाइटी की सचिव डॉ. रेनू टंडन ने कहा कि समाज में मासिक धर्म को लेकर अभी भी खुलकर बात नहीं होती। इसी वजह से लड़कियां और महिलाएं अपने दर्द को छिपाती हैं। इस सीएमई के साथ हम एक जन-जागरूकता अभियान भी चला रहे हैं। 

उन्होंने कहा "अगर किसी लड़की को हर महीने इतना तेज दर्द होता है कि उसे स्कूल या कॉलेज जाना मुश्किल हो जाए, या दवाएं लेने के बाद भी आराम न मिले, तो उसे तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यह सामान्य नहीं है।"

प्रमुख संरक्षक डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने बताया कि एंडोमेट्रियोसिस सीधे तौर पर महिला की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बांझपन का एक बड़ा कारण बन सकता है। इसलिए 20 से 40 वर्ष की महिलाओं को इसके लक्षणों के प्रति सजग रहना बहुत जरूरी है।

प्रेस वार्ता का विवरण

इसी कार्यक्रम के संदर्भ में मीडिया बंधुओं के लिए एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा, एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।


प्रेस वार्ता का विवरण:

दिनांक: 11 जुलाई 2026, शुक्रवार

समय: दोपहर 3.30 बजे

स्थान: होटल रॉयल क्लिफ, कानपुर


फोग्सी क्या है

फोग्सी यानी फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया भारत का सबसे बड़ा स्त्री रोग विशेषज्ञों का संगठन है। रीच कार्यक्रम के तहत फोग्सी देश के छोटे-बड़े शहरों में जाकर डॉक्टरों को नई तकनीक और शोध से जोड़ रहा है। कानपुर में होने वाला यह सीएमई उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

केओजीएस के पदाधिकारियों ने कहा कि कानपुर में महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इस तरह के वैज्ञानिक मंच बहुत जरूरी हैं। उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे इस जन-जागरूकता अभियान में सहयोग करें ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक यह जानकारी पहुंच सके।

डॉ. कंचन शर्मा, अध्यक्ष केओजीएस

डॉ. रेनू टंडन, सचिव केओजीएस  

डॉ. मीरा अग्निहोत्री, प्रमुख संरक्षक केओजीएस

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