सीढ़ियों की जंग जीती, दिव्यांग गीता को मिला ग्राउंड फ्लोर का आवास
कानपुर जनता दर्शन में रखी फरियाद बनी राहत की वजह, जिलाधिकारी की पहल पर वर्षों पुरानी समस्या का हुआ समाधान
➡️कानपुर नगर।
एक आम इंसान के लिए सीढ़ियां चढ़ना उतरना रोज का काम है। लेकिन जिस व्यक्ति के दोनों पैर मुड़े हों, जिसके लिए एक-एक सीढ़ी पहाड़ जैसी हो, उसके लिए ये रोज की जंग बन जाती है। पिछले 5 साल से अजीतगंज की रहने वाली दिव्यांग गीता यही जंग लड़ रही थीं।
मार्च 2019 में उन्हें मा. कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तृतीय चरण के तहत ब्लॉक संख्या-292 में तृतीय तल पर आवास संख्या 292/14 आवंटित किया गया था। उस समय उनके पास दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं था। बिना प्रमाणपत्र के प्रशासन उन्हें दिव्यांग कोटे का लाभ नहीं दे सका। नतीजा ये हुआ कि उन्हें तीसरी मंजिल का फ्लैट मिल गया।
➡️रोज की परेशानी बनी नर्क
गीता बताती हैं "सर, सुबह राशन लाने जाना हो, दवाई लानी हो या बैंक का काम हो। हर बार तीन मंजिल उतरना और फिर चढ़ना पड़ता था। घुटनों में दर्द, हाथों में लाठी और पीठ पर सामान। कई बार तो गिरते-गिरते बची हूं।"
बारिश के दिनों में सीढ़ियां और ज्यादा फिसलन भरी हो जाती थीं। पड़ोसियों की मदद से ही वो ऊपर-नीचे आ जा पाती थीं।
पिछले 4 साल में उन्होंने कई बार प्रार्थना पत्र दिए। लेखपाल से लेकर तहसील तक चक्कर लगाए। लेकिन फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही घूमती रही। इसी बीच उन्होंने दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी बनवा लिया था। शासन के नियमों के अनुसार दिव्यांग लाभार्थियों को भूतल पर ही आवास दिया जाना चाहिए। लेकिन उनका पुराना आवंटन बाधा बन गया था।
जनता दर्शन बनी उम्मीद की किरण
पिछले महीने गीता ने हिम्मत करके जनता दर्शन में जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के सामने अपनी फरियाद रखी। उन्होंने अपनी पूरी व्यथा बताई और दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी दिखाया।
जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासनादेश का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि "किसी भी दिव्यांग को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना पड़े। ये हमारी जिम्मेदारी है।"
➡️प्रशासन ने दिखाई तत्परता
जिलाधिकारी के आदेश के बाद राजस्व और आवास विभाग की टीम ने फाइल खंगाली। शासनादेश में स्पष्ट लिखा है कि दिव्यांग लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर भूतल पर आवास आवंटित किया जाएगा। ब्लॉक 292 में भूतल पर एक आवास खाली था - संख्या 292/04।
सभी दस्तावेजों के परीक्षण के बाद गीता का पूर्व आवंटन निरस्त कर नया आवंटन आदेश जारी कर दिया गया। अब उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर आवास संख्या 292/04 मिला है। आदेश में 15 दिनों के अंदर कब्जा देने के निर्देश भी हैं।
➡️गीता की आंखों में राहत के आंसू
खबर सुनकर गीता की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा "5 साल से जो दर्द सहा, आज उसका अंत हुआ। अब मुझे सीढ़ियां नहीं चढ़नी पड़ेंगी। मैं अपने पैरों पर चलकर घर से बाहर जा सकूंगी। जिलाधिकारी साहब और जनता दर्शन का बहुत-बहुत धन्यवाद।"
स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक जरूरतमंद की मदद की है।
➡️DM का बयान
इस संबंध में जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा "शासन की मंशा है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ 100% पहुंचे। जनता दर्शन में आने वाली हर शिकायत का निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है। गीता का मामला नियमों के अंतर्गत था, इसलिए तुरंत कार्रवाई कराई गई। हमारा प्रयास है कि कोई भी दिव्यांग, बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं के लिए भटके नहीं।"
➡️क्या कहता है शासनादेश
आवास विभाग के शासनादेश के अनुसार शहरी गरीब आवास योजना में दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक और एकल महिलाओं को भूतल पर आवास देने का प्रावधान है। इसके लिए लाभार्थी के पास वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।
गीता के इस मामले से ये संदेश भी गया है कि अगर दस्तावेज पूरे हों और सही जगह पर फरियाद की जाए तो समाधान जरूर होता है। जनता दर्शन जैसे मंच आम लोगों के लिए उम्मीद बनकर उभरे हैं।
अब गीता को उम्मीद है कि 15 दिन में वो अपने नए घर में शिफ्ट हो जाएंगी। उनके लिए ये सिर्फ मकान नहीं, बल्कि सम्मान और सुविधा की जीत है।
संपादकः सत्य का असर समाचार पत्र, कानपुर
पत्रकारः जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
संपर्क सूत्र: 9956834016
ईमेल:satyakaasarnews24@gmail.com
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