CSA विश्वविद्यालय में संपन्न 6 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण: 50 किसानों को मिली उन्नत तकनीक की जानकारी, सरकारी योजना और लोन की भी दी जानकारी

पत्रकार जितेंद्र कुमार सिंह पटेल 

कानपुर CSA विश्वविद्यालय में संपन्न 6 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण: 50 किसानों को मिली उन्नत तकनीक की जानकारी, सरकारी योजना और लोन की भी दी जानकारी

CSA विश्वविद्यालय कानपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग में 20 से 25 जुलाई तक 6 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण आयोजित हुआ। 50 प्रशिक्षणार्थियों को उत्पादन, बीमारी प्रबंधन, सरकारी सब्सिडी और लोन की जानकारी दी गई।

कानपुर युवाओं और किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा *20 से 25 जुलाई 2026 तक* छः दिवसीय *मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम* का सफल आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए *कुल 50 प्रशिक्षणार्थियों* ने भाग लिया, जिनमें *10 महिलाएं* भी शामिल थीं। महिलाओं की सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि मशरूम की खेती अब ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक सशक्त माध्यम बन रही है।

विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी*

प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन की पूरी तकनीक से अवगत कराया। 

डा० मुकेश श्रीवास्तव*, विभागाध्यक्ष, पादप रोग विज्ञान विभाग ने मशरूम के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डाला। *डा० विनीता सिंह*, प्राध्यापक, खाद्य विज्ञान एवं पोषण ने मशरूम के मूल्यवर्धक उत्पाद और विभिन्न प्रकार के मशरूम व्यंजन बनाना सिखाया। 

इसके अलावा *डा० शिवानी चौधरी, डा० सिद्धार्थ सिंह तथा डा० सेंथिलकुमार एस*, पादप रोग विज्ञान विभाग और *श्रीमती रोशनी*, कीट विज्ञान विभाग ने श्वेत बटन मशरूम और ढिंगरी मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक, मशरूम की बीमारियों एवं उनके प्रबंधन, मशरूम फार्म की संरचना और खेती के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान पर विस्तार से चर्चा की।

प्रशिक्षकों ने बताया कि कम जगह, कम लागत और कम समय में मशरूम की खेती से अच्छी आमदनी की जा सकती है। यह खेती बेरोजगार युवाओं और छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

सरकारी योजनाओं और लोन की दी जानकारी*

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी योजनाओं पर आधारित सत्र रहा। इसमें *श्री उमेश चन्द्र*, जिला उद्यान अधिकारी, *डा० धनंजय सिंह*, फाउंडर एण्ड डायरेक्टर भारत एग्रीटेक और *श्री शिवम त्रिपाठी*, एम०एस०एम०ई० ने प्रतिभागियों को बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन सी सब्सिडी और लोन की सुविधा दी जा रही है।

उन्होंने *प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना*, स्पान उत्पादन, मशरूम फार्म संरचना के लिए अनुदान और बैंक लोन प्रक्रिया के बारे में स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि इच्छुक किसान 40% तक की सब्सिडी पर मशरूम यूनिट लगा सकते हैं।

समाधान के साथ मिला प्रशिक्षण मैनुअल*

कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रशिक्षणार्थियों की सभी शंकाओं का समाधान किया गया। कई किसानों ने फार्म बनाने, मार्केटिंग और रोग प्रबंधन को लेकर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने मौके पर ही जवाब दिया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी 50 प्रशिक्षणार्थियों को *प्रशिक्षण मैनुअल* भी प्रदान किया गया। विभाग का उद्देश्य है कि प्रशिक्षण के बाद भी किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो और वे मैनुअल की मदद से घर पर सफलतापूर्वक मशरूम उत्पादन कर सकें।

कृषि में नया आयाम*

डा० मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन कम है। ऐसे में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आगे भी इस तरह के निःशुल्क प्रशिक्षण आयोजित करता रहेगा।

प्रशिक्षण में शामिल महिला प्रतिभागियों ने बताया कि 2-3 हजार रुपये की लागत से शुरू की जाने वाली यह खेती घर पर आसानी से की जा सकती है और इससे हर महीने 15-20 हजार रुपये तक की कमाई संभव है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक, छात्र और कृषि विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मशरूम प्रशिक्षण के सफल आयोजन से यह उम्मीद जताई जा रही है कि कानपुर मंडल में आने वाले समय में मशरूम उत्पादन का दायरा बढ़ेगा और युवा स्वरोजगार की ओर आकर्षित होंगे।

*समाचार पत्र:* सत्य का असर समाचार पत्र, कानपुर  

*पत्रकार:* जितेंद्र कुमार सिंह पटेल  

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*ईमेल:* satyakaasarnews24@gmail.com  

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